My Archive

29 March, 2009

एक दिन जब सवेरे सवेरे

एक दिन जब सवेरे सवेरे, सुरमई से अंधेरे की चादर हटा के, एक पर्वत के तकिये से सूरज ने सर जो उठाया तो देखा- दिल की वादी में चाहत का मौसम है और यादों की डालियों पर अनगिनत बीते लम्हों की कलियाँ खिलने लगी हैं।
अनकही अनसुनी सी आरजू , आधी सोई हुई आधी जगी हुई, आँखें मलते हुए देखती है- लहर दर लहर मौज दर मौज, जैसे बहती हुई ज़िन्दगी है हर पल नई।
ज़िन्दगी, जिसके दामन में एक मोहब्बत भी है, कोई हसरत भी है, पास आना भी है और दूर जाना भी है.......
और ये एहसास है कि वक्त झरने सा बहता हुआ, जा रहा है ये कहता हुआ कि दिल की वादी में चाहत का मौसम है और यादों कि डालियों पर अनगिनत बीते लम्हों की कलियाँ खिलने लगी हैं। - A Song From The Movie Veer Zaraa